अपराध

तिघरा पंचायत में लाखों की अनियमितता उजागर, उपयंत्री, सहायक यंत्री, सरपंच-सचिव की भूमिका संदिग्ध, जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे

 

सतना। सतना जिले के मझगवां जनपद की ग्राम पंचायत तिघरा में मनरेगा अंतर्गत कराए गए खेत तालाब कार्यों में लाखों रुपये की गंभीर अनियमितता सामने आई है। जांच दल की रिपोर्ट में ग्राम रोजगार सहायक के साथ-साथ तत्कालीन उपयंत्री, सहायक यंत्री, सरपंच और सचिव की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार मापपुस्तिका (एमबी) क्रमांक 424 में सुन्दरलाल पटेल खेत तालाब कार्य का कुल मूल्यांकन मात्र 42,976 रुपये दर्ज है, जबकि तत्कालीन उपयंत्री सतीष कुमार समेले द्वारा ई-एमबी में उसी कार्य का अंतिम मूल्यांकन 3,14,928 रुपये 17 फरवरी 2025 को किया गया। इसके बावजूद मापपुस्तिका के अगले पृष्ठ में 2 अप्रैल 2025 को सहायक यंत्री से सत्यापन का कथन लिखा गया, जिसे जांच दल ने नियम विरुद्ध माना है।

ई-एमबी और मापपुस्तिका में भारी अंतर
इसी प्रकार अन्य कार्यों में भी ई-एमबी और मापपुस्तिका में दर्ज राशि में बड़ा अंतर पाया गया है। मनरेगा नियमों के अनुसार उपयंत्री द्वारा ई-एमबी में मूल्यांकन और सहायक यंत्री द्वारा ऑनलाइन सत्यापन के बाद ही भुगतान संभव है, लेकिन जांच में इस प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

निजी बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन उपयंत्री सतीष कुमार समेले द्वारा ग्राम रोजगार सहायक मुकेश कुमार विश्वकर्मा से अपने स्वयं के बैंक खाते एवं अपने भाई कन्हैयालाल के खाते में ऑनलाइन भुगतान प्राप्त किया गया। इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। साथ ही राजकुमार मिश्रा खेत तालाब एवं सुन्दरलाल पटेल खेत तालाब कार्य का ई-एमबी मूल्यांकन होने के बावजूद संबंधित मापपुस्तिकाओं (एमबी क्र. 292 व 494) में प्रविष्टि नहीं की गई। बिना कार्य के ई-एमबी का ऑनलाइन सत्यापन करने में तत्कालीन सहायक यंत्री कृष्ण प्रताप सिंह (केपी सिंह) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

सरपंच और सचिव पर भी सवाल
जांच दल ने यह भी स्पष्ट किया है कि तत्कालीन सरपंच श्रीमती कुसमा देवी एवं सचिव हितेन्द्र सिंह द्वारा इन अनियमितताओं की जानकारी समय रहते जनपद कार्यालय को नहीं दी गई। कारण बताओ नोटिसों का संतोषजनक जवाब न देना भी उनके पदीय दायित्वों के उल्लंघन को दर्शाता है। जांच प्रतिवेदन में ग्राम रोजगार सहायक मुकेश कुमार विश्वकर्मा की अनियमितता सिद्ध मानी गई है, जबकि उपयंत्री, सहायक यंत्री, सरपंच और सचिव की भूमिका को भी संदिग्ध ठहराया गया है।

 

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