अपराध

एमआरपी से 40 रुपए ज्यादा वसूले, शराब ठेकेदार पर 1 लाख का जुर्माना

सतना। 180 एमएल प्रीमियम व्हिस्की की एक बोतल पर एमआरपी से 40 रुपए अधिक वसूलना सतना के एक शराब ठेकेदार को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने धवारी स्थित कम्पोजिट वाइन शॉप के तत्कालीन संचालक एवं मैनेजर आलोक सिंह पर 1 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया है। आयोग के अध्यक्ष श्यामाचरण उपाध्याय एवं सदस्य विद्या पांडेय की पीठ ने आदेश दिया कि ठेकेदार को यह राशि एक माह के भीतर ग्राहक को अदा करनी होगी। तय समय में भुगतान न होने पर पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
10 हजार रुपए प्रकरण व्यय भी देना होगा
इसके अलावा आयोग ने ठेकेदार को ग्राहक को 10 हजार रुपए प्रकरण व्यय देने का भी निर्देश दिया है। ओवररेटिंग पर लगाई गई यह करीब 2500 गुना पेनाल्टी शुक्रवार को शराब कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
तीन साल पुराना मामला
अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह और अजय सिंह रघुवंशी के अनुसार, मामला लगभग तीन वर्ष पुराना है। 18 जून 2022 को अजय सिंह ने धवारी स्टेडियम स्थित कम्पोजिट वाइन शॉप से 180 एमएल प्रीमियम व्हिस्की 350 रुपए में खरीदी थी, जबकि उस पर अंकित MRP 310 रुपए थी।
नियमों के अनुसार उस व्हिस्की की— न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP): 282 रुपए अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP): 310 रुपए
इसके बावजूद सेल्समैन ने 40 रुपए की अवैध वसूली की। ग्राहक द्वारा ऑनलाइन भुगतान करने के बाद भी बिल देने से मना कर दिया गया। सेल्समैन ने यह भी कहा कि शराब पर बिल देने का कोई प्रावधान नहीं है।

आयोग ने माना— सेवा में कमी और अनुचित व्यापार
ओवररेटिंग और बिल न दिए जाने से नाराज ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया।

आयोग की अहम टिप्पणी
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अक्सर शराब के नशे में ग्राहक कीमत पर ध्यान नहीं देता, जिसका फायदा उठाकर विक्रेता अतिरिक्त वसूली करते हैं। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि यदि दुकान से प्रतिदिन 100 बोतलें इसी तरह बेची जाएं, तो—
एक दिन में 4 हजार रुपए एक माह में लगभग 1.20 लाख रुपए की अवैध वसूली संभव है।
ठेकेदार ने नहीं दिया जवाब
आयोग ने ठेकेदार को कई अवसर दिए, लेकिन कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग के संज्ञान में यह तथ्य भी आया कि संबंधित शराब विक्रेता प्रभावशाली है, इसके बावजूद कानून के तहत सख्त निर्णय लिया गया।

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