30 लाख की फर्जी बिलिंग, संविदाकार पर एफआईआर

सतना। जिले के छह शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में रंगाई-पुताई और मरम्मत के नाम पर फर्जी बिल लगाकर 30 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में एक संविदाकार के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में जाली दस्तावेजों के माध्यम से करीब 30 लाख रुपए के देयक प्रस्तुत किए गए थे। मामले की शिकायत चांदमारी रोड, धवारी गली नंबर-1 निवासी पवन कुमार श्रीवास्तव ने की थी। इसके आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने संविदाकार सत्यव्रत तिवारी, निवासी देवरा खटखरी, जिला मऊगंज के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(5), 62, 318(4) और 336(3) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।
हस्ताक्षर संदिग्ध पाए जाने पर खुला मामला प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब डीईओ कार्यालय में प्रस्तुत बिलों पर संबंधित स्कूल प्राचार्यों के हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। संदेह होने पर सभी संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों से हस्ताक्षर और कार्य का सत्यापन कराया गया।
प्राचार्यों ने स्पष्ट रूप से बताया कि— उनके विद्यालयों में कोई रंगाई-पुताई या मरम्मत कार्य नहीं हुआ, और बिलों पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर
जिला शिक्षा अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस को दी। कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह से चर्चा कर डीईओ को तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। सीएसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी ने भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से षड्यंत्रपूर्वक निम्न विद्यालयों के नाम पर फर्जी बिल लगाए थे— संदीपनी स्कूल, बगहा – ₹5,00,000
हाईस्कूल, माधवगढ़ – ₹4,99,730 उमावि, खम्हरिया तिवरियान – ₹4,99,978 हाईस्कूल, सिजहटा – ₹4,99,500 उमावि, गोरड्या – ₹4,99,245 हाईस्कूल, मुड़हा – ₹4,99,473 इन सभी बिलों में रंगाई-पुताई एवं मरम्मत कार्य दर्शाया गया था, जबकि वास्तव में कोई कार्य नहीं कराया गया।
रीवा में भी सामने आ चुका है मामला
उल्लेखनीय है कि सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन द्वारा इससे पहले रीवा जिले में भी फर्जी बिल लगाकर 28 लाख रुपए आहरित करने का मामला सामने आ चुका है, जिससे इस प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है।




