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गुलाब शुक्ला बने समाजसेवा की मिसाल, खुद के खर्चे से बनवाई दो गांवों को जोड़ने वाली सड़क

सतना। सतना जिले में जहां आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं उद्योगपति एवं समाजसेवी गुलाब शुक्ला ने समाजहित की एक मिसाल कायम कर दी है। आज़ादी के 79 साल बाद पहली बार सतना और रीवा जिले की सीमा से सटे पटना कला और कौड़ीहाई गांव को आपस में जोड़ने वाली सड़क बनकर तैयार हुई है। यह सड़क किसी सरकारी योजना या एनजीओ के सहयोग से नहीं, बल्कि गुलाब शुक्ला ने अपने निजी खर्चे से बनवाई है। करीब 2 किलोमीटर लंबी इस सड़क के बनने से पहले दोनों गांवों के बीच की दूरी लगभग 15 किलोमीटर थी, जो अब घटकर मात्र 2 किलोमीटर रह गई है। इसके साथ ही सतना और रीवा जिले भी इन गांवों के माध्यम से सीधे जुड़ गए हैं।

हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण

सड़क का लोकार्पण समारोह पटना गांव स्थित देवी जी मंदिर परिसर में आयोजित किया गया, जहां हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने समाजसेवी गुलाब शुक्ला की जमकर सराहना की और इसे गांवों के भविष्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

बरसात में खेत जाना था जान जोखिम में डालना

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में खेतों तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा था। घुटनों तक पानी, सांप-बिच्छुओं का डर और कच्चे रास्तों पर चोट लगने की आशंका हमेशा बनी रहती थी। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन वर्षों तक कोई समाधान नहीं निकला।

जब व्यवस्था ने साथ नहीं दिया, तब आगे आए गुलाब शुक्ला

सरकारी स्तर पर निराशा हाथ लगने के बाद गुलाब शुक्ला ने खुद पहल करने का निर्णय लिया। शुरुआत में कुछ ग्रामीणों को इस पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प के बाद सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ और आज यह सड़क दोनों गांवों को जोड़ते हुए सैकड़ों किसानों के लिए राहत का रास्ता बन गई है।

सिर्फ सड़क नहीं, आत्मसम्मान का रास्ता

यह सड़क केवल खेतों को नहीं, बल्कि किसानों की गरिमा, आत्मसम्मान और भविष्य को जोड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल उन लोगों के लिए एक सबक है जो केवल वादों तक सीमित रहते हैं। गुलाब शुक्ला ने साबित किया है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो समाज की तस्वीर बदली जा सकती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे समाजसेवियों को सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि अन्य लोग भी समाजहित में आगे आएं।

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