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चित्रकूट में विकास के नाम पर खुला खेल: सड़क–नाली निर्माण में गंभीर भ्रष्टाचार!

न मजबूत नींव, न ढाल की समझ—पहली बारिश में बह सकता है ‘विकास’

कटनी में बैठे इंजीनियर के भरोसे चित्रकूट, निगरानी शून्य

चित्रकूट। नगर परिषद चित्रकूट द्वारा कराए जा रहे सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और तकनीकी अनियमितताएं उजागर हो रही हैं। मोहकमगढ़ तिराहा से लेकर पीलीकोठी तिराहा तक चल रहे निर्माण कार्य ने शासन की गुणवत्ता मानकों की पोल खोल दी है।

जिन नालियों के माध्यम से पूरे चित्रकूट नगर का गंदा पानी निकाला जाना है, उन्हीं नालियों का निर्माण बिना मजबूत बेस के किया जा रहा है। न तो खुदाई की निर्धारित गहराई का पालन हो रहा है और न ही पानी की निकासी के लिए आवश्यक ढाल (स्लोप) का कोई वैज्ञानिक प्रबंधन नजर आ रहा है।

जहां जैसी जमीन, वहीं वैसा निर्माण

स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदारों के पेटी ठेकेदार जहां जैसी मिट्टी मिल रही है, उसी कच्ची जमीन पर सीधे सीमेंट, गिट्टी और बालू डालकर काम चला रहे हैं। नालियों में सरिया का नाममात्र का जाल बिछाकर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। यह निर्माण न तो मानक अनुरूप है और न ही दीर्घकालीन टिकाऊ।

इंजीनियर कटनी में, चित्रकूट भगवान भरोसे

सबसे गंभीर सवाल निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर खड़ा हो रहा है। सड़क, नाली और अन्य विकास कार्यों की देखरेख का जिम्मा ऐसे इंजीनियर को सौंपा गया है, जिनकी नियमित पदस्थापना कटनी जिले में है। ऐसे में चित्रकूट में चल रहे करोड़ों रुपये के कार्यों की मौके पर निगरानी कैसे हो रही है, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि महीनों से निर्माण चल रहा है, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी की नियमित मौजूदगी नजर नहीं आती। यही कारण है कि ठेकेदार मनमानी पर उतारू हैं और गुणवत्ता से खुला समझौता किया जा रहा है।

पहली बारिश में खुल सकती है पोल

नगरवासियों का आशंका है कि यदि इसी तरह काम चलता रहा तो यह नालियां पहली तेज बारिश में ध्वस्त हो सकती हैं। इससे न केवल सड़कें खराब होंगी बल्कि गंदा पानी सड़कों और घरों में भरने से जनजीवन भी प्रभावित होगा।

🔸️जिम्मेदारी तय होगी या फिर चुप्पी?

अब सवाल यह है कि

🔸️क्या नगर परिषद इस घटिया निर्माण की जांच कराएगी?

🔸️क्या तकनीकी स्वीकृति और मापदंडों की सार्वजनिक जानकारी दी जाएगी?

🔸️क्या दूरस्थ पदस्थ इंजीनियर से जवाबदेही तय की जाएगी?

फिलहाल तो चित्रकूट में विकास कार्यों की हालत देखकर यही कहा जा सकता है कि विकास के नाम पर जनता के पैसे से प्रयोग किया जा रहा है, और इस पूरे खेल का मालिक भगवान ही नजर आ रहा है।

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